• Hindi
  • Heritage Edge
  • Sports Edge
  • Wildlife Edge
SHARP. BITTER. NEUTRAL.
No Result
View All Result
  • Login
The Edge Media
Friday, January 2, 2026
  • Home
  • National Edge
  • State Edge
  • Political Edge
  • World Edge
  • Entertainment Edge
  • Business Edge
  • Sports Edge
  • Home
  • National Edge
  • State Edge
  • Political Edge
  • World Edge
  • Entertainment Edge
  • Business Edge
  • Sports Edge
No Result
View All Result
The Edge Media
No Result
View All Result
Home Environmental Edge

जैव विविधता के ह्रास से जलवायु में परिवर्तन व वायरस का हमला

जैव विविधता प्रकृति का अभिन्न अंग है और यह पर्यावरण को सुरक्षित रखने तथा पारिस्थितिक तन्त्र को परिचालित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है । आक्सीजन का उत्पादन, कार्बन डॉई-ऑक्साईड में कमी करना, जल चक्र को बनाए रखना, मृदा को सुरक्षित रखना और विभिन्न चक्रों को संचालित करने में इसकी महती भूमिका है । जैव विविधता पोषण के पुन: चक्रण, मृदा निर्माण, जल तथा वायु के चक्रण, जल सन्तुलन आदि के लिए महत्त्वपूर्ण है । मानव की अनेक आवश्यकताएँ जैसे भोजन, वस्त्र, आवास, ऊर्जा, औषधि, आदि की पूर्ति में भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देती है, इसी कारण इसका आर्थिक महत्व भी है ।

The Edge Media by The Edge Media
5 years ago
in Environmental Edge, hindi
Reading Time: 1 min read
0
जैव विविधता के ह्रास से जलवायु में परिवर्तन व वायरस का हमला
Share on FacebookShare on TwitterShare on LinkedInShare via TelegramSend To WhatsApp

जैव-विविधता – एक प्रजाति के अंदर पाई जाने वाली विविधता, विभिन्न जातियों के मध्य अंतर तथा पारिस्थितिकीय विविधता आती है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण स्तर, मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से विभिन्न प्रजातियों के आवास नष्ट हो रहे हैं जिसके कारण बहुत सारी प्रजातियाँ या तो विलुप्त हो गईं या होने के कगार पर हैं। प्राकृतिक आपदाओं के कारण कभी-कभी जैव समुदाय के संपूर्ण आवास एवं प्रजाति का विनाश हो जाता है। बढ़ते तापमान के कारण समुद्री जैव-विविधता का विनाश हो जाता है। बढ़ते तापमान के कारण समुद्री जैव-विविधता खतरे में है। साथ ही हम पाते हैं कि विभिन्न माध्यमों से जब एक क्षेत्र में दूसरे क्षेत्र विशेष से विदेशी प्रजातियाँ प्रवेश करती हैं तो वे वहाँ की मूल जातियों को प्रभावित करती हैं, जिससे स्थानीय प्रजातियों में संकट उत्पन्न होने लगता है। साथ ही जानवरों का अवैध शिकार, कृषि क्षेत्रों का विस्तार, तटीय क्षेत्र का नष्ट होना और जलवायु परिवर्तन भी जैव-विविधता को प्रभावित करते हैं। भारत में जैव-विविधता ह्रास का एक प्रमुख कारण जल एवं वायु प्रदूषण है।

पृथ्वीग्रह – जीवास्म की विविधता कभी पाँच अरब से अधिक थी | भूस्थलीय जैव विविधता आमतौर पर भूमध्य रेखा के पास अधिक पाई जाती है, जो गर्म जलवायु के कारण  उच्च प्राथमिकता से पैदा होती है। जैव विविधता पृथ्वी पर समान रूप से वितरित नहीं की जाती है, और उष्णकटिबंधीय में सबसे समृद्धरूप में पाई जाती है, जो पृथ्वी की सतह के क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत से कम को आक्षादित  करता हैं और यहाँ पर दुनिया की समस्त लगभग 90 प्रतिशत प्रजातिया शामिल हैं। समुद्री जैव विविधता आमतौर पर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तटों पर सबसे अधिक होती है, जहां समुद्र की सतह का तापमान सबसे अधिक होता है, और सभी महासागरों में मध्य अक्षांशीय बैंड में हैं। प्रजातियों की विविधता में अक्षांशीय ढाल हैं। जैव विविधता आम तौर पर हॉटस्पॉट में एकत्रित (क्लस्टर) होती है, और आने वाले समय के अनुसार बढ़ रही है, परन्तु भविष्य में धीमा होने की संभावना होगी। कोरोना महामारी के दौर में, जैव विविधता को समझने की कोशिश करते हैं क्या इसके विलुप्त होने से – इसे केवल जीनों, प्रजातियों या आवादी के कुल योग के रूप में नहीं माना जा सकता है ।

जीवविज्ञानी अक्सर जैव विविधता के वर्गीकरण में विज्ञानी निरन्तर नवीन प्रजाति एवं उनके समूहीकरण को वर्णित करते हैं । पक्षी, स्तनधारी, मछली, पौधों की प्रजातियों को अधिक वर्णित किया गया है जबकि सूक्ष्म जीवाणुओं, बैक्टीरिया, फंगस आदि का कम । अधिकांशतः जैव विविधता के अनुमान उष्ण कटिक-धीय वर्षा वाले वनों में किए गए शोध पर आधारित हैं ।

इस परिभाषा का मात्र एक फायदा यह है कि यह अधिकांश परिस्थितियों का वर्णन करने लगता है और पहले से पहचाने जाने वाले जैविक प्रकार के पारंपरिक प्रकारों का एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है:

 

•      प्रजातीय विविधता•      पारिस्थितिक विविधता•      आनुवंशिक विविधता और आणविक विविधता•      कार्यात्मक विविधता – एक आबादी के भीतर विषम प्रजातियों का एक उपाय (जैसे कि विभिन्न उत्पन्न तंत्र, विभिन्न गतिशीलता, शिकारी बनाम शिकार, आदि)।

 

जैव विविधता का माप जटिल है और इसमें गुणात्मक के साथ-साथ मात्रात्मक पहलू भी है। यदि एक प्रजाति आनुवांशिक रूप से अद्वितीय है – उदाहरण के तौर पर –  यह पेड़ की एक बड़ी भुजा पर विशिष्ट, अजीबोगरीब प्लैटिपस की तरह है – इसकी जैव विविधता का मूल्य कई समान प्रजातियों के साथ एक प्रजाति से अधिक है, क्योंकि यह उन्हें संरक्षित करता है | इसे हम पृथ्वी ग्रह के विकासवादी इतिहास का एक अनोखा हिस्सा मान सकते हैं ।

पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 बिलियन वर्ष है। पृथ्वी पर जीवन के सबूत कम से कम 3.5 बिलियन साल पहले से मिले हैं, जो कि ईओराचियन युग के दौरान एक भूवैज्ञानिक पपड़ी; पिघली हडियन ईऑन के बाद जमना शुरू हुआ था, जिसकी पुष्टि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में खोजे गए 3.48 बिलियन साल पुराने बलुआ पत्थर में माइक्रोबियल मैट जीवाश्म पाए जाने से होती हैं। पश्चिमी ग्रीनलैंड में खोजे गए 3.7 बिलियन वर्ष पुराने मेटा-सेडिमेंटरी चट्टानों में एक बायोजेनिक पदार्थ के अन्य प्रारंभिक भौतिक साक्ष्य ग्रेफाइट हैं। अभी वर्ष 2015 में, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 4.1 अरब साल पुरानी चट्टानों में “जैविक जीवन के अवशेष” पाए गए थे। शोधकर्ताओं में से एक के अनुसार, “यदि जीवन की उत्पत्ति पृथ्वी से अपेक्षाकृत पहले हुई होती, तो यह ब्रह्मांड में जीवन आम हो सकता था ।

इससे यह स्पष्ट है कि पृथ्वी की उत्पत्ति जीवन की उत्पत्ति से पहले हुई है |  पर्यावरण में तेजी से हो रहे क्षरण के कारण, मुख्यत कई प्रजातियाँ बड़े पैमाने पर विलुप्त रही है। पाँच अरब से अधिक पृथ्वी पर कभी रहने वाली प्रजातियों की मात्रा मे से 99.9 प्रतिशत से अधिक प्रजातियाँ का विलुप्त होने का अनुमान है। पृथ्वी की वर्तमान प्रजातियों की संख्या पर अनुमान 10 मिलियन से 14 मिलियन तक है, जिनमें से लगभग 1.2 मिलियन का अभी तक आकड़ा तैयार किया गया है और 86 प्रतिशत से अधिक का अभी तक वर्णित नहीं किया गया है। विश्व के वैज्ञानिकों ने मई 2016 में, इसका आकलन पुनः आकलन किया है कि पृथ्वी पर 1 ट्रिलियन प्रजातियो का अनुमान है परन्तु वर्तमान में केवल एक-हजार में से एक प्रतिशत को ही वर्णित किया गया है।

पृथ्वी पर संबंधित डीएनए बेस जोड़े की कुल मात्रा 5.0 x 1037 है और इसका वजन 50 बिलियन टन है। इसकी तुलना में, जीवमंडल के कुल द्रव्यमान का अनुमान 4 टीटीसी (ट्रिलियन टन कार्बन) जितना है। जुलाई 2016 में, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों के लास्ट यूनिवर्सल कॉमन एनस्टर (LUCA) से 355 जीन के एक सेट की पहचान करने की सूचना दी।मनुष्यों के प्रभावी होने की अवधि ने, एक जैव विविधता में कमी आने और आनुवंशिक विविधता के साथ नुकसान को पहुचाने का उदाहरण मिलता है। जिसे होलोसिन विलुप्त होने का नाम दिया, जो मुख्यरूप से मानवीय प्रभावों, विशेष रूप से जैव-निवासो के नष्ट होने से होती है। इसके फलस्वरूप, जैव विविधता कई तरीकों से मानव स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव डालती है, जबकि इसके कुछ ही नकारात्मक प्रभावों का अभी तक अध्ययन किया जाता रहा है। मानवता के लिए पर्यावरणीय छरण एक बड़ा खतरा

पर्यावरण क्षति व जलवायु परिवर्तन वास्तव में भारत में स्थिति कुछ दसको से बहुत खराब है। अब दुनिया के पर्यावरणविदो द्वारा यह बताया जा रहा है कि  प्रदूषण कम करना अत्यन्त जरूरी है क्योंकि डब्ल्यूएचओ की पिछले वर्षो की रिपोर्ट में, 14-भारतीय शहरों को दुनिया में सबसे अधिक प्रदूषित बताया गया है, पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि वायु प्रदूषण एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट है और भारत को इससे निपटने के लिए और अधिक उपाय करने की आवश्यकता है। जिसे एक “सख्त चेतावनी” के रूप में स्वीकारना होगा और इसके लिए आक्रामक राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी किए गए डेटा ने 2020-21 में पीएम-2.5 के स्तर के मामले में दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित लोगों की सूची में शामिल 14-भारतीय शहरों में दिल्ली, लखनऊ  और वाराणसी आदि को दिखाया। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने यह भी कहा कि दुनिया में 10 मेंसे 9 लोग सांस लेने वाली वायु जिसमें उच्च स्तर के प्रदूषक होते हैं, प्रभावित हैं। हालांकि, एनसीएपी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से तीन को दर्शाता है – गया, पटना और मुजफ्फरपुर । वास्तव में भारत की स्थिति बहुत खराब है। अतः सभी शहरों में राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के लिए एक मजबूत कानून की आवश्यकता है। भारत में कार्डिएक बीमारियों और स्ट्रोक ने भी रुग्णता के 28 प्रतिशत की वृद्धि में योगदान दिया है।

 आज जब करोना संक्रमण महामारी विगत दिसम्बर 2019 से चीन से प्रारम्भ होकर विश्व के लगभग 190 देशो से अधिक को द्वतीय व तृतीय लहर से भी प्रभावित कर चुका है और विश्व में लगभग 16.5 करोड़ लोग संक्रमित हुए है और 34.46 लाख लोगो की मृत्यु हो चुकी है | भारत में कोरोना के द्वितीय लहर में आज हमारी आवादी के 2.60 करोड़ संक्रमण के शिकार हुए और वही  मृत्यु भी 2.61 लाख पहुँच गयी जिससे विश्व में हम दूसरे स्थान पर पहुँच गए |  अब हमें प्रभावी हो रहे सूक्ष्म जीवाणुओं, बैक्टीरिया, फंगस आदि को जो वर्फीली चट्टानों में लाखो साल से जिवंत दबे थे, आज वर्फ के पिघलने से वातावरण में बाहर आ रहें है, उनको पहचानना होगा और उनके घातक प्रभावों को रोकने हेतु प्रयास करना होगा |

 

अतः हमें इस विश्व जैव विविधता दिवस-2021 पर संकल्प लेने के लेना होगा और यदि हम प्रकृत को  संरक्षित करने के लिए प्रभावी व त्वरित कार्यवाही नहीं करते है, तो आनेवाले समय में जैव विविधता के ह्रास से कोरोना वायरस जैसी संक्रमण की महामारी व तूफानो के आने की  निरंतरता से मानवता के लिए खतरा बना रहेगा और आनेवाली शताब्दी का प्रारम्भ हमारी पीढ़ी के लिए श्रृष्टि एक सपना न बन जायेगा |

प्रोफ० भरत राज सिंह, महानिदेशक,  

स्कूल आफ मैनेजमेन्ट साइंसेस

*****

Previous Post

MLA requests PM Modi to ban PUBG India Avatar Battlegrounds.

Next Post

Tokyo Olympics on Time, In spite of the Japanese opposition: IOC Chief

Related News

Accused in 2012 Pune Serial Blasts Case Shot Dead in Maharashtra

Accused in 2012 Pune Serial Blasts Case Shot Dead in Maharashtra

by The Edge Media
December 31, 2025
0

The police have seized evidence from the spot and are examining CCTV footage from the surrounding areas as part of...

Nitish Kumar Declares Assets Worth Rs 1.65 Crore In Latest Bihar Government Disclosure

Nitish Kumar Declares Assets Worth Rs 1.65 Crore In Latest Bihar Government Disclosure

by The Edge Media
December 31, 2025
0

According to the declaration, Nitish Kumar holds Rs 20,552 in cash and close to Rs 57,800 deposited across different bank...

Faridabad Van Assault Case Shocks City as Two Arrested

Faridabad Van Assault Case Shocks City as Two Arrested

by The Edge Media
December 31, 2025
0

Faridabad police spokesperson Yashpal Yadav said the accused will be produced before the court, and their identities will be disclosed...

Magisterial Probe Ordered After Loco Train Collision Inside Chamoli Hydropower Tunnel

Magisterial Probe Ordered After Loco Train Collision Inside Chamoli Hydropower Tunnel

by The Edge Media
December 31, 2025
0

Meanwhile, the Railways clarified that the trains involved in the incident were not part of the Indian Railways network.

Foreign Investors Exit Indian Equities in Record Numbers During 2025, Revival Seen in 2026

Foreign Investors Exit Indian Equities in Record Numbers During 2025, Revival Seen in 2026

by The Edge Media
December 28, 2025
0

Domestic factors are also expected to support a revival in foreign flows.

MPCB Cracks Down on Ready Mix Concrete Plants to Tackle Mumbai Air Pollution

MPCB Cracks Down on Ready Mix Concrete Plants to Tackle Mumbai Air Pollution

by The Edge Media
December 28, 2025
0

Following a high level review meeting chaired by MPCB chairman Siddhesh Kadam, the board constituted four special inspection teams for...

Discussion about this post

Recommended

Sinopharm vaccine offers poor protection among the elderly, shows study

4 years ago

Didi have to do politics, then she will have to go out of Bengal- Modi

5 years ago

Popular News

  • Nitish Kumar Declares Assets Worth Rs 1.65 Crore In Latest Bihar Government Disclosure

    Nitish Kumar Declares Assets Worth Rs 1.65 Crore In Latest Bihar Government Disclosure

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • Accused in 2012 Pune Serial Blasts Case Shot Dead in Maharashtra

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • Magisterial Probe Ordered After Loco Train Collision Inside Chamoli Hydropower Tunnel

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • Faridabad Van Assault Case Shocks City as Two Arrested

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • Salman Khan on Love Marriage and the Child Within a Portrait of Bollywood’s Eternal Bachelor

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • Hindi
  • Heritage Edge
  • Sports Edge
  • Wildlife Edge
SHARP. BITTER. NEUTRAL.

© 2024 The Edge Media All Rights Reserved.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • Home
  • National Edge
  • State Edge
  • Political Edge
  • World Edge
  • Entertainment Edge
  • Business Edge
  • Sports Edge

© 2024 The Edge Media All Rights Reserved.